Wednesday, August 31, 2022



                          जगदीश नलिन

समकालीन युवा रचनाकारों में लोकप्रिय कुमार वीरेन्‍द्र 'लुकाठियन' एक लब्धप्रतिष्ठ कवि हैं। इनका 'विलाप नहीं' एक कविता-संग्रह प्रकाशित एवं पुरस्कृत हो चुका है। जब तब पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कविताएँ प्रकाशित होती रहती हैं। इनकी एक कविता का मेरे द्वारा किया गया अंग्रेज़ी अनुवाद प्रस्तुत है।


ताला

 

आती है गौरय्या

और दरवाज़े के लटकते ताले पर

मारती है ठोर

 

कुत्‍ता आता है

खोलने की कोशिश में

ताबड़तोड़ पटकता है पाँव

 

दौड़ती हुई आती है गाय

और ज़ोर-ज़ोर से हँकरने लगती है

 

सोच नहीं पाता है डाकिया

किसको दे वह चिट्ठी

ताला कई दिनों से लटका है यहाँ

 

पुरवइया और पछुआ हवा के झोंके

हिला नहीं पाते हैं ताले को

कितना भारी हो गया है

यह ताला

 

कितना अखरता है  

एक व्‍यक्ति का न होना !

००

 

The Lock


The sparrow comes

And pecks on the hanging

Lock of the door


The dog comes

And trying to open the door

Thamps its fore feet

With its all force repeatedly


The cow comes running

And starts to low loudly


The postman doesn't feel able

To think as to whom

He should deliver the letter

The lock has been hanging here

For lots of days


The blows of

The eastern and western winds

Are not able to swing the lock

How much heavy has

The lock become


How much is displeasing

A man's not being among us

 

00


(नोट : हिन्‍दी के वरिष्‍ठ कवि, अनुवादक और सम्‍पादक जगदीश नलिन जी के फ़ेसबुक पर 8 दिसम्‍बर, 2020 को टिप्‍पणी के साथ पोस्‍ट की गई अनुवाद सहित रचना।)

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