अमरेन्द्र मिश्र
हम जो रचते हैं
अपने मित्रों को अपनी रचनात्मकता की सूचना देते हुए और बार-बार उसका स्मरण कराते हुए हमने अक्सर देखा है और यह अच्छा भी है, लेकिन सृजन का असली आनन्द तो तब है जब आपकी रचना किसी अनजान जगह से और अपरिचित नाम से पहचानी जाए और
बधाई
का एक कॉल आ जाए। जब ऐसा हो तो न सिर्फ़ आपका वह दिन बेहतर बन जाए, बल्कि कुछ और अच्छी रचनाएँ आप लिख जाऍं।एक समर्पित सम्पादक का यह पहला कर्तव्य होना चाहिए कि वह एक प्रतिभा को निखरने का भरपूर मौका दे।
अभी हाल ही में एक मुलाक़ात के दौरान उन्होंने बताया कि यह घटना उन्हें याद है ! यह हमारी पहली मुलाक़ात थी !
००
(नोट : हिन्दी के वरिष्ठ लेखक और सम्पादक अमरेन्द्र मिश्र जी के फ़ेसबुक पर 14 सितम्बर, 2019 को पोस्ट की गई टिप्पणी।)
No comments:
Post a Comment